रिश्ते  का  डब्बा

रिश्ते का डब्बा

कुछ लोगों के लिए रिश्ते टेट्रा पैक (Tetra Pack) की तरह होते हैं।

जब डिब्बा भरा होता है तो लोग “स्ट्रॉ” की तरह डब्बे को छेदकर, इंसान के भीतर, गहराइयों की तह तक उतर जाते हैं।

जब तक डिब्बे में “मतलब की चीज़” भरी है, तब तक उसकी देखभाल अनमोल चीज़ की तरह करते हैं। ध्यान रखते हैं – कहीं गिर ना जाए, कहीं से टूट ना जाए, कोई दूसरा उसे उठा कर ना ले जाए (उनका माल कोई दूसरा ना पी जाए)। 😁😁

जब तक डिब्बा भरा रहता है तब तक ये लोग उसे “सुड़क-सुड़क” कर पीते रहते हैं और जब डब्बा खाली हो जाता है तो पैरों से कुचल कर कूड़ेदान में फेंक देते हैं और निकल पड़ते हैं एक नए डिब्बे की तलाश में।
भगवान ही बचाए ऐसे लोगों से..🤓🤓

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