क्या हंसने के लिए भी कोई कारण होना चाहिए?

क्या हंसने के लिए भी कोई कारण होना चाहिए?

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Hansi ke kaaran :

Hansi ke kaaran: व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो हंसने का का कोई ना कोई कारण होना ही चाहिए क्योंकि बिना किसी कारण, हंसी का आना बहुत कठिन है। पर यह भी सत्य है कि कई बार हंसी स्वयं ही “अपने आप का कारण” बन जाती है।

इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने के लिए ज़रा कल्पना करें, आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग बहुत ही मस्त और हास्यबोध से परिपूर्ण होते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग, जहां भी पहुंच जाते हैं अपनी हंसी से एक उदास माहौल को भी जीवंत और उर्जावान बना देते हैं।

यदि आप एक दोस्तों या परिवार-जनों के समूह में बैठे हैं और वह व्यक्ति अचानक किसी ‘छोटी सी’ बात पर हंसना शुरू कर दे तो न जाने क्या होता है; किसी संक्रमण की तरह, अन्य लोगों के चेहरे पर भी स्वतः हंसी उभरनी शुरू हो जाती है और एक भारी से माहौल में भी जैसे ज़िन्दगी की लहर सी तैर जाती है…

यही हंसी का शाश्वत नियम है- “हंसो और हंसाओ।”

एक हंसता हुआ चेहरा न जाने कितनी “चेहरों” को उदासी के भंवर से बाहर निकाल सकता है; इसलिए जहां तक और जब तक हो सके अपनी हंसी बनाए रखें।

अगर किसी के पास हंसने का कोई उपयुक्त कारण ना हो तो कोशिश कीजिए आप उसकी मुक्त हंसी का कारण बन उसे हंसा सके और उसकी नीरस जिंदगी में खुशी का उजियारा फैला सकें।

जैसे एक दीपक से दूसरा दीपक और इस प्रकार अनेकों दीपक प्रज्वलित कर अंधियारे को दूर किया जा सकता है, उसी प्रकार एक चेहरे से दूसरे चेहरे तक और फिर अनेकानेक चेहरों पर हंसी को सजा कर इस पूरी दुनिया को खूबसूरत बनाया जा सकता है।

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