हवाई लाल के किस्से कारनामे : 3 चूहे मारने की मशीन Hawai Lal ke kisse 3

हवाई लाल के किस्से कारनामे : 3 चूहे मारने की मशीन Hawai Lal ke kisse 3

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एक बार हुआ ऐसा कि दुनिया भर में चूहे बहुत बढ़ गए। जहां देखो चूहे ही चूहे!! पूरी दुनिया परेशान आखिर करे तो करे क्या? आखिर में सब ने यह फैसला किया कि कोई ऐसी मशीन बनाई जाए जो बहुत सस्ती हो और चूहों को मार भी सके।


सो अमेरिका में एक प्रतियोगिता को आयोजित करने का निश्चय किया गया और पूरी दुनिया की सरकारों को अपने-अपने देश की ओर से एक-एक वैज्ञानिक भेजने का न्योता भेजा गया।


भारत के पास भी प्रतियोगिता में भाग लेने का न्योता आया। एक महीने बाद प्रतियोगिता थी।
बहुत सोच-विचार कर आखिर में सरकार ने यह प्रोजेक्ट हवाई लाल को देने का फैसला किया ।


अब क्योंकि प्रतियोगिता 1 महीने बाद होनी थी तो हवाई लाल को बता दिया गया कि 1 महीने में चूहों को मारने की, सस्ती और बढ़िया मशीन बनानी है। हवाई लाल मस्ती में बोले “कोई बात नहीं, हो जाएगा।”


5 दिन बीत गए। सारी दुनिया के वैज्ञानिक रात दिन लगे हुए थे पर हवाई लाल पहले की तरह ही जब देखो मस्ती करते और घूमते फिरते दिखते।


सरकार ने हवाई लाल से पूछा “कुछ हुआ?”


हवाई लाल बोले “हो जाएगा।”


10 दिन बीते, हवाई लाल पहले की तरह ही अभी भी मस्त। सरकार ने फिर पूछा “कुछ हुआ?”
हवाई लाल फिर बोले “हो जाएगा।”


20 दिन बीत गए। हवाई लाल अब भी ऐसे ही सारे दिन मस्त घूमते दिखते। सरकार ने हवाई लाल से फिर पूछा कि “कुछ हुआ?”


उनका पहले जैसा ही रटा-रटाया जवाब, “हो जाएगा।”


सरकार बड़ी परेशान !! उन्हें लगा कि शायद यह काम गलत आदमी को सौंप दिया गया है। पर अब समय इतना भी नहीं बचा था कि किसी और को यह काम सौंपा जा सके; सो, मरते क्या ना करते, सरकार ने भी भगवान का नाम लेकर उधर से आंखें बंद कर ली और एक महीना पूरा होने का इंतजार करने लगी।


आखिर एक महीना पूरा हुआ और वह दिन आ पहुंचा जब हवाई लाल को अमेरिका में प्रतियोगिता के लिए जाना था।


दरवाजे पर गाड़ी आकर खड़ी हो गई और हॉर्न बजाया। हवाई लाल मस्ती में हाथ में एक छोटा सा झोला लटकाए सीढ़ियों से नीचे उतरे और गाड़ी में बैठ गए। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है???


खैर साहब प्रतियोगिता का दिन भी आ पहुंचा।


एक-एक करके सब देशों के वैज्ञानिक मंच पर आते और अपनी मशीन का प्रदर्शन करते।
पहले अमेरिका का वैज्ञानिक आया और अपनी मशीन दिखाई जिसमें बहुत सारे पंखे और ब्लेड लगे हुए थे। वैज्ञानिक ने माइक से बताया कि जैसे ही चूहे इस मशीन के अंदर आएंगे सारे के सारे पंखे चलने लगेंगे और चूहे कटकर मर जाएंगे।


“वाह वाह”, तालियाँ बजने लगीं।
उसके बाद आया रूस के वैज्ञानिक का नंबर। उसने अपनी मशीन मंच पर सजा दी। एक बहुत बड़ा सा लोहे का पिंजरा था जिसमें अंदर, जगह-जगह पर तार बिछे हुए थे। वैज्ञानिक ने बताया कि “जैसे ही चूहे इसके अंदर आएंगे एक इलेक्ट्रिक करंट शुरू हो जाएगा और सभी चूहे इन तारों से चिपक कर मर जाएंगे।”


“वाह-वाह”, तालियां फिर बजने लगी।


एक-एक करके वैज्ञानिक आते और अपनी मशीनें दिखाते। हॉल तालियों से गूंज उठता।”


फिर आया पड़ोसी देश के वैज्ञानिक का नंबर। उसने भी दिखाया एक बहुत बड़ा सा लोहे का पिंजरा, जिसमें जगह-जगह मिठाइयां और ब्रेड रखी हुई थी। वैज्ञानिक ने मंच से घोषणा की “इस मिठाई और ब्रेड की खुशबू से चूहे इसकी तरफ खिंचे चले आएंगे पर जैसे ही वह इसे खाएंगे तो पता है क्या होगा??”

“इन सब मिठाइयों और ब्रेड में जहर मिला हुआ है एक-एक करके सभी ढेर हो जाएंगे।“

“वाह वाह!”, सारे हॉल में तालियां गड़गड़ा उठी।

आखिर में नंबर आया अपने हवाई लाल का!!

हवाई लाल तसल्ली से, पूरी मस्ती में उठे। उनके हाथ में उनका वही “छोटा सा कपड़े का झोला” था। किसी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हवाई लाल की मशीन है कहां??

हवाई लाल तसल्ली से मंच पर चढ़े। मंच पर लकड़ी की एक मेज रखी थी। हवाई लाल ने अपने झोले में हाथ डाला और दो कीलें निकाली दोनों को एक दूसरे से 1 फुट की दूरी पर गाड़ दिया।
हवाई लाल ने झोले में फिर हाथ डाला और एक लोहे का बहुत बारीक तार निकाला और एक कील से दूसरी कील पर ले जाकर बांध दिया। अब उन्होंने तार के “उस पार”, एक कील की तरफ काजू रख दिए और एक कील की तरफ बिस्कुट और खुद दूर खड़े हो गए।

किसी को कुछ भी पल्ले नहीं पड़ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है??!!

सबने हवाई लाल की ओर प्रश्नवाचक नजरों से देखा। हवाई लाल धीरे से मुस्कुराए और माइक लेकर बोले, “देखो फंडा बिल्कुल क्लियर है। तार के इस तरफ से चूहा आएगा; तार पर अपनी गर्दन रखकर देखेगा तो उसे एक तरफ दिखेगा बिस्कुट और एक तरफ दिखेगा काजू। वह परेशान हो जाएगा वह सोचेगा कि “काजू खाऊँ या बिस्कुट खाऊं?” वह एक बार गर्दन काजू की तरफ घुमाएगा, एक बार बिस्कुट की तरफ…।”


“काजू खाऊँ, बिस्कुट खाऊँ…काजू खाऊँ, बिस्कुट खाऊँ… काजू खाऊँ, बिस्कुट खाऊँ!!! साले की गर्दन ही नहीं कट जाएगी??”


“ वाह वाह वाह!!!”, अब तो हॉल तालियों से थर्रा ही उठा। सबने एक सुर में हवाई लाल को विजेता घोषित कर दिया। पर सारे प्रदर्शन के बाद पता नहीं क्या हुआ कि प्रतियोगिता के आयोजकों ने अचानक घोषणा की, कि अभी दो दिन बाद एक बार फिर से टॉप तीन वैज्ञानिकों की मशीनों को, बाहर से आने वाले कुछ एक्सपर्ट जजों के सामने रखा जाएगा और उसी दिन मशीन का फाइनल निर्णय होगा। फाइनल प्रतियोगिता के लिए, सिर्फ अमेरिका का वैज्ञानिक, पड़ोसी देश का वैज्ञानिक और हवाई लाल को चुना गया।


कोई बात नहीं साहब, अब दो दिन इंतजार करने के अलावा सब के पास चारा ही क्या था; सो तीनों वैज्ञानिकों को होटल के अलग-अलग कमरों में ठहरा दिया गया।

फाइनल प्रतियोगिता से पहली रात को जब सब वैज्ञानिक, रात का खाना खाकर लौट रहे थे तो अचानक हवाई लाल ने देखा कि उनके कमरे से पड़ोसी देश का वैज्ञानिक निकल रहा है। उनकी समझ में कुछ नहीं आया। पर फिर भी हवाई लाल आराम से गए और जाकर सो गए।

खैर आखिर में फाइनल प्रतियोगिता का समय आ पहुँचा। सबसे पहले अमेरिका के वैज्ञानिक ने अपनी मशीन का प्रदर्शन किया। उसके प्रदर्शन के आधार पर जजों ने उसका परिणाम अपनी कॉपी में नोट कर लिया।

उसके बाद नंबर आया पड़ोसी देश के वैज्ञानिक का। उसने भी अपनी मशीन का प्रदर्शन किया। उसका परिणाम भी जजों ने अपनी कॉपी में नोट कर लिया।

अब अंत में नंबर आया हवाई लाल का… ।

हवाई लाल ने अपने झोले के अंदर नजर डाली तो हैरान हो गए, झोले में से काजू और बिस्कुट गायब थे!! पर हवाई लाल तो ठहरे हवाई लाल…

हवाई लाल पहले की तरह ही मंच पर पहुंचे, वैसे ही उन्होंने मेज़ को देखा, दो कीलें निकालीं, मेज पर ठोकीं और दूर जाकर खड़े हो गए।

अब लोग फिर हक्के बक्के रह गए। अब भला यह मशीन कैसे काम करेगी? लोग हैरानी से हवाई लाल का मुंह देखने लगे।


हवाई लाल फिर हौले से मुस्कुराए और माइक पर बोले “देखो फंडा अब भी बिल्कुल क्लियर है। अभी भी चूहा तार के इस तरफ से आएगा, तार पर गर्दन रखेगा और देखेगा। अब वह फिर परेशान हो जाएगा जब वह देखेगा, ‘काजू नहीं है…बिस्कुट नहीं है’।”


“अब चूहा बार-बार गर्दन घुमाकर देखेगा, ‘काजू कहां है बिस्कुट कहां है’… ‘काजू कहां है बिस्कुट कहां है’… ‘काजू कहां है.. काजू कहां है बिस्कुट कहाँ है’??? साले की गर्दन ही नहीं कट जाएगी।”


अब जो तालियां हॉल में पिटी हैं उसका तो भला कहना ही क्या? जज भी अपनी सीट से उठकर ‘पगला’ गए।

अब तो किसी के पास कहने-सुनने की कोई गुंजाइश थी ही नहीं। आप खुद ही सोच सकते हैं कि प्रतियोगिता का विजेता भला रहा कौन होगा?


और कौन हमारे हवाई लाल…

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